Sunday, January 25, 2015

निकलो ना यूं अयां होकर : एक प्रेम ग़ज़ल ---

बसंत पंचमी पर होली का डंडा गड़ जाता है ! यानि मस्ती भरे एक खुशहाल दौर की शुरुआत हो जाती है ! घर बाहर खेत खलियान , सभी जगह रंग बसंती छाने लगता है ! ऐसे मे प्रस्तुत है , एक प्रेम / शृंगार ग़ज़ल : 


निकलो ना यूं अयां होकर , के दुनिया बड़ी खराब है ,
रखना इसे संभाल कर , ये हुस्न लाज़वाब है ! 

नयनों की गहराई मे , राही ना डूब जाये कहीं ,
आँखें ये तेरी झील सी , मचलती हुई चेनाब हैं ! 

होठों की सुर्ख़ लालिमा ,  यूं लुभा रही है हमे ,
मयकश को मयख़ाने मे, ज्यों बुला रही शराब है ! 

गालों के बसंती रंग पे , शरमाये खुद शृंगार भी,
ठंड की सुहानी धूप मे , ये खिलते हुए गुलाब हैं ! 

चर्चे तुम्हारे हुस्‍न के , होने लगे हैं गली गली , 
कैसे संभाले दिल कोई , ये ज़लवा बेहिसाब है ! 

तारीफ़ तुम्हारे रूप की , करे क्या "तारीफ" , 
तू जागती आँखों का , इक हसीन ख्वाब है ! 

Sunday, January 18, 2015

दातों मे पीड़ा , कीड़ा या केरीज --


बहुत वर्ष पहले की बात है ! बस  मे बैठे हम चंडीगढ़ की ओर जा रहे थे ! रास्ते मे एक स्टेंड पर एक सेल्समेन बस मे चढ़ा और बोलना शुरू हो गया अपनी विशेष आवाज़ मे ! भाईयो , बहनों , मेहरबान , कद्रदान , ज़रा सुनो लगा कर कान ! क्या आपके दांत मे दर्द रहता है ? दांत मे कीड़ा लगा है ? डाक्टर को दिखाया , कोई आराम नहीं आया ! अब घबराने की कोई ज़रूरत नहीं ! हमारे पास है एक नायाब नुश्खा , ये दवा की शीशी जिसकी एक बूंद लगाते ही आपके दांत का कीड़ा घुट कर मर जायेगा और आपका दर्द तुरंत गायब हो जायेगा ! ईलाज़ की गारंटी है , एक बार इस्तेमाल करके देखिये , आपको खुद ही विश्वास हो जायेगा ! 
इसके बाद उसने कहा -- आप मे से किसी के दांत मे दर्द रहता है ? एक साथ कई लोग बोल पड़े -- जी रहता है ! उसने एक आदमी को कहा -- मूँह खोलो ! आपके दांत मे कीड़ा लगा है ! अभी दवा की एक बूंद लगाता हूँ , फिर असर देखिये ! फिर उसने शीशी खोलकर माचिस की एक तिल्ली उसमे डुबोई और उस व्यक्ति के दांत पर लगा दी ! दो तीन मिनट के बाद उसने फिर उसका मूँह खुलवाकर उसी तिल्ली को मूँह मे घुमाया और सबको दिखाते हुए बोला -- लीजिये ज़नाब , कीड़ा मर गया और ये रहा ! तिल्ली की नोक पर एक तिनका सा लगा दिखाई दे रहा था ! उसने बड़ी शान से कहा -- ये है हमारी जादुई दवा , लगाते ही असर करती है ! लेकिन इसकी कीमत सुनकर आप हैरान हो जायेंगे -- कीमत ५० नहीं , २० नहीं , दस भी नहीं , कीमत है मात्र ५ रुपये ! जी हाँ , केवल और केवल ५ रुपये मे आपके दांत का दर्द खत्म ! 
फिर देखते ही देखते उसकी दसियों शीशियाँ बिक गई ! फिर जैसे ही बस चलने को हुई , उसने अपना थैला संभाला और बस से नीचे उतर गया ! और हम डॉक्टर होकर सोचते ही रह गए कि कितना आसान है पब्लिक को बेवकूफ़ बनाना ! 

वास्तव मे दांत का कीड़ा कोई कीड़ा नहीं होता ! इसे डेंटल केरिज कहते हैं जिसमे दांत का सुरक्षा कवच जिसे एनेमल कहते हैं , उसमे ब्रेक हो जाता है ! इसका कारण होता है दांतों के बीच फंसे खाने के कण जिन पर बेक्टीरिया के प्रभाव से अम्ल पैदा होता है जो एनेमल को ब्रेक कर देता है ! ऐसा तभी होता है जब हम अपने मूँह को साफ नहीं रखते , विशेषकर खाने के बाद ! इसलिये मूँह को साफ रखना अत्यंत आवश्यक होता है ! 

अक्सर शहर मे लोग सुबह ब्रश तो करते हैं , कुछ लोग सुबह शाम दोनो वक्त भी करते हैं , लेकिन खाने के बाद बस एक घूँट पानी पीकर ही काम चला लेते हैं ! ऐसा करने से मूँह मे दांतों के बीच खाना रह जाता है जो मूँह मे मौजूद बेक्टीरिया के रिएक्शन से सड़ने लगता है ! इसे ना सिर्फ मूँह मे दुर्गन्ध होने लगती है , बल्कि लम्बे समय तक ऐसा होने से डेंटल एनेमल भी गलने लगती है ! इससे दांत का भीतरी हिस्सा जिसे पॅल्प कहते हैं , एक्सपोज हो जाता है जिससे दांत मे दर्द रहने लगता है ! धीरे धीरे दांत बिल्कुल खाली हो जाता है जिसे आम बोलचाल की  भाषा मे कीड़ा लगना कहते हैं !

जिस तरह खाना खाने से पहले हाथ धोना आवश्यक होता है , उसी तरह खाने के बाद कुल्ला करना आवश्यक होता है ! लेकिन कुल्ला करना अनपढ़ और गांव के लोगों का काम माना जाता है ! खाने के बाद खाली एक घूँट पानी पीकर काम चलाने का ही नतीज़ा होता है कि पढ़े लिखे शहरी लोगों के दांतों मे भी डेंटल केरिज हो जाती है ! इसीलिये मूँह से भी अक्सर दुर्गन्ध आती है ! 
ज़रा सोचिये , फैशन आवश्यक है या स्वास्थ्य ! 


Tuesday, January 13, 2015

ज्यादा बोलने की आदत तो हमे है नहीं ...


एक दिन एक महिला बोली ,

डॉक्टर साहब , मेहरबानी कीजिये ,
और कोई अच्छी सी दवा दीजिये ! 

मेरे पति रात मे बहुत बड़बड़ाते हैं ! 
लेकिन वो क्या बोलते हैं, हम समझ नहीं पाते हैं ! 

हमने दवा लिख कर कहा, यदि आप ये दवा सुबह शाम लेंगे, 
तो आपके पति अवश्य ही नींद मे बड़बड़ाना बंद कर देंगे ! 

वो बोली नहीं डॉक्टर साहब , आप फीस भले ही दुगना कर दें ,
लेकिन दवा ऐसी दीजिये कि वो साफ साफ बोलना शुरू कर दें !

उनके बड़बड़ाने से हम बिल्कुल भी नहीं घबराते हैं ,
लेकिन पता तो चले कि वे नींद मे किस को बुलाते हैं ! 

हमने कहा बहन जी , हमारी दुआ उनके लिये है , 
लेकिन ये दवा उनके लिये नहीं, आपके लिये है ! 

हम आपके पति का हौसला बिना दवा के ही बुलंद कर देंगे , 
आप उन्हे दिन मे बोलने दें , वे रात मे बड़बड़ाना खुद ही बंद कर देंगे !