Sunday, February 15, 2009

वो वैलेंटाइन डे कब आएगा--

ये कैसी भेड चाल है, ये कैसा भ्रम जाल?
क्यों अपनी चाल को भूल कर , हंस चला कव्वे की चाल।
अपना देश, धर्म और संस्कृति को क्यों छोड़े जाते हो,
वैलेंटाइन तो याद है, पर खून के रिश्तों को तोड़े जाते हो!

क्यों भूल गए न ,
भूल गए न उस जननी को,
सर्व कष्ट हरनी को,
जो हर नाजों नखरे उठाती है,
राजा कह कर बुलाती है ,
फ़िर बेटा चाहे जैसा हो।
दो प्यार के बोल और दो पल अपनों का साथ ,
गर उसे भी मिले तो कैसा हो!

क्यों भूल गए न ,
भूल गए न उसको जो जन्म दाता है ,
ख़ुद एक कोट में जीवन काटे ,
पर हर वर्ष रीबोक के नए शूज दिलाता है।
ख़ुद झेले ब्लू लाइन के झटके ,
पर आपको नैनो के सपने दिखाता है।
फ़िर अपनी नई वैलेंटाइन की अकड़ में ,
क्यों भूल गए उसको ,
जीवन के पतझड़ में?

और भूल गए न ,
भूल गए न ,
कलाई पर बहन की राखी का नर्म अहसास ,
भूल गए भाई भाई के खून के रिश्ते की मिठास,
और भूल गए वो धरती माँ, वो सूर्या, वो आकाश।
और मैला कर दिया न गंगा मैय्या को,
मैली हुई गंगा मैय्या और मैले पवन के झोंके,
फ़िर भी आप खुश हैं ,
अपनी नई वैलेंटाइन के साथ होके!

अरे वैलेंटाइन तो हैं ये पाँच तत्व ,
जो हैं जीवन के मूल आधार ,
पर वो वैलेंटाइन डे कब आएगा ,
जब मानव को होगा इन सबसे प्यार?
वो वैलेंटाइन डे कब आएगा---?

Saturday, February 14, 2009

वलेंटाइन डे ---

काम वाली बाई ,
जब दस बजे तक न आई,
मैडम को गुस्सा आया,
उसका मोबाईल मिलाया,
तो वो बोली ,
बीबी जी , आज हम
वेलन्ताइन डे मना रहे हैं।
हमारे पतिदेव हमें
एक रोमांटिक फ़िल्म दिखा रहे हैं।
स्ल्म्दोग ---
पत्नि बोली, तुम्हे उसमे
रोमांस नजर आता है?
वो बोली नही,
चांस नजर आता है।
करोड़पति बनने का,
मालूम है नही बनने का,
पर ख्वाब देखने में क्या जाता है।
और इस तरह कामवाली तो सिनेमा घर में ,
वेलन्ताइन डे मनाती रही ,
और घरवाली घर में झाडू पोछा लगाती रही।
जय हो।

Saturday, February 7, 2009

आदमी बनाम कुत्ता

पता चला है कि
इंग्लॅण्ड के आदमी और कुत्ते ,
काम में इतना मशगूल हो जाते हैं ,
कि मालिकों की तरह उनके कुत्ते भी,
बच्चे पैदा करना ही भूल जाते हैं।
अब तो ब्रिटिश सरकार को भी ,
ये सत्य सताता है,
कि वहां दोनों प्रजातियों में ,
बच्चे कम, और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है।
अब इस विचार से हमारी सरकार तो,
बडी भाग्यशाली है,
क्योंकि यहाँ बच्चे और कुत्ते ,
दोनों के मामले में खुशहाली है।
और इस खुशहाली से ,
हमारी सरकार कुछ तो चिंतित नजर आ रही है,
पर ऐसा लगता है, अमेरिकन सरकार को ,
इसकी चिंता ज्यादा सता रही है।
और जब ज्योर्ज बुश को ,
चिंता ने अधिक सताया,
तो एक वैज्ञानिक आयोग बैठाया,
और उन्होंने पता लगाकर बताया ,
कि धरती पर १.३ मिलियन बिलियन ,
मनुष्य रह सकते हैं।
यानी अभी हम और दो लाख गुना ,
लोगों का बोझ सह सकते हैं।
अब ये जान कर उनकी तो ,
जान में जान आई,
पर उनके सामान्य ज्ञान पर ,
हमको बड़ी हँसी आई।
अरे हमें तो ये बात pahle ही पता थी,
तभी तो हम चैन से जिए जा रहे हैं,
और बेफिक्र होकर बेधड़क,
बच्चे पैदा किए जा रहे हैं।
जय , जय हो।